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बांका में ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम पर सवाल, 10 शिक्षकों को नोटिस; जिले से बाहर उपस्थिति दर्ज करने का आरोप

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बांका जिले में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जिले से बाहर रहते हुए हाजिरी लगाने के आरोप में 10 शिक्षकों को शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी कर सात दिनों में जवाब मांगा है।

बांका/आलम की खबर: बिहार में सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू की गई ई-शिक्षाकोष आधारित ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बांका जिले से सामने आए ताजा मामले ने शिक्षा व्यवस्था की निगरानी प्रणाली और तकनीकी सत्यापन की मजबूती पर गंभीर बहस खड़ी कर दी है। जिले के विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत 10 शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने अपने वास्तविक स्थान से अलग, यानी जिले की सीमा से बाहर रहते हुए भी ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की। इस गंभीर अनियमितता के बाद शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।

इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले के शिक्षा महकमे में हलचल मच गई है। विभागीय स्तर पर यह मामला अब सिर्फ एक सामान्य अनियमितता नहीं बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि 4 मई को कुछ शिक्षकों की उपस्थिति ऐसे स्थानों से दर्ज हुई, जो भौगोलिक रूप से बांका जिले की सीमा से बाहर थे। यह जानकारी सामने आते ही अधिकारियों ने इसे गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ संभावित फर्जीवाड़े की श्रेणी में रखा।

जांच में खुला बड़ा मामला, लोकेशन ट्रैकिंग से हुआ खुलासा

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग द्वारा ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही थी। इसी दौरान सिस्टम में कुछ ऐसे लॉग मिले, जिनमें शिक्षकों की लोकेशन संदिग्ध पाई गई। तकनीकी जांच में यह सामने आया कि कुछ शिक्षकों ने उस समय उपस्थिति दर्ज की जब वे स्कूल परिसर में मौजूद नहीं थे, बल्कि जिले से बाहर किसी अन्य स्थान पर थे।

इस खुलासे के बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से सभी 10 शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिया। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक और प्रमाणित जवाब नहीं दिया गया, तो उनके खिलाफ विभागीय नियमावली के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सात दिन में मांगा गया जवाब, वेतन कटौती की भी संभावना

शिक्षा विभाग की ओर से जारी नोटिस में शिक्षकों को सात दिनों का समय दिया गया है। उनसे यह भी कहा गया है कि वे यह स्पष्ट करें कि किन परिस्थितियों में उन्होंने जिले से बाहर रहते हुए उपस्थिति दर्ज की। विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले में संबंधित दिन का वेतन रोका जा सकता है और आगे चलकर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी संभव है।

अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन कुछ मामलों में इसका गलत इस्तेमाल सामने आना चिंता का विषय है। ऐसे में अब निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है।

किन-किन शिक्षकों पर गिरी गाज

इस मामले में जिन शिक्षकों को नोटिस भेजा गया है, उनमें कई अलग-अलग प्रखंडों के शिक्षक शामिल हैं। अमरपुर प्रखंड के एनपीएस अठमाहा के राजीव कुमार और आदर्श बालिका उच्च विद्यालय के राजन कुमार सिंह का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। इसके अलावा बांका प्रखंड के यूएमएस बेलाटीकर के फैयाज कुमार, बाराहाट प्रखंड के यूएचएस सहरना के मोहम्मद महताब आलम और रजौन प्रखंड के मध्य विद्यालय मोरामा के कृष्णा नाथ ज्ञानेश भी सूची में शामिल हैं। वहीं यूएमएस अलीपुर-धनियागड़िया के श्याम किशोर कुमार के अलावा शंभूगंज प्रखंड के चार शिक्षक—अनुराग कुमार, रमेश कुमार, संदीप कुमार और शेखर कुमार—को भी नोटिस जारी किया गया है।

पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल

यह पहली बार नहीं है जब बांका जिले में ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को लेकर सवाल खड़े हुए हों। इससे पहले भी कई बार फर्जी हाजिरी और तकनीकी दुरुपयोग के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई थी। बावजूद इसके, इस तरह की घटनाएं पूरी तरह थम नहीं पाई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तकनीकी निगरानी को वास्तविक समय में और मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक इस तरह की अनियमितताओं की संभावना बनी रहेगी।

शिक्षा विभाग का सख्त रुख

विभागीय अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही या सिस्टम के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ई-शिक्षाकोष प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और आने वाले दिनों में और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल कुछ शिक्षकों की गलती नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की समीक्षा का संकेत भी देता है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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